ولم يكن للأزهري طريقة معينة في تسجيل مشافهاته:
1-فتارة يعتمد على الدليل السلبي"أي عدم سماعه عن العرب"في نفي وجود اللفظ أو التعبير ومن ذلك قوله:
أ- ولم أسمعهم يقولون في الغراب: نعق ولكنهم يقولون: نعب"1/ 257".
ب- لم أسمع الوضع في شيء من كلامهم"3/ 84".
2-وتارة ينص على القبيلة أو الجماعة اللغوية التي سمع منها.
وأكثر من سمع عنهم.
8 بنو تميم"1/ 129، 3/ 263، 5/ 169، 9/ 228، 10/ 562"
* بنو عقيل"4/ 327، 6/ 279، 13/ 255".
* بنو كلاب - الكلابيون"2/ 238، 15/ 446، 650".
* بنو كليب"1/ 376، 7/ 144".
* بنو نمير"13/ 158، 15م 650."
* بنو سعد"2/ 219، 7/ 178".
* قيس"3/ 326، 10/ 562."
* بنو أسيد"10/ 94، 110".
ثم طييء"14/ 359"، وبنو مضرس"15/ 124"، وبنو فزارة"11/ 155"، وبنو سليم"10/ 546"، والهجريون"1/ 344"، والبحرانيون"1/ 62".
3-وهو في معظم حالاته يسجل سماعه دون أن ينسبه ومن ذلك:
أ- سمعت بعض العرب"1/ 64، 106، 2/ 125، 284....".
ب- سمعت العرب"1/ 113، 151، 152، 178، 308، 328....".
جـ- سمعت غير واحد من العرب"1/ 212، 267....".