[3] انظر:"أصول الكافي"للكليني، باب التقيَّة، 2/ 217، 219.
[4] انظر:"من لا يحضره الفقيه"لابن بابويه 2/ 80،"بحار الأنوار"للمجلسي 75/ 412، 414.
[5] انظر:"إكمال الدين"لابن بابويه ص 355، و"بحار الأنوار"للمجلسي 75/ 412.
[6] انظر:"تفسير الطبري"6/ 316.
[7] انظر:"تفسير البغوي"2/ 26.
[8] انظر:"تفسير الرازي"4/ 170.
[9] انظر:"وسائل الشيعة"للحر العاملي 11/ 470.
[10] انظر:"بحار الأنوار"، باب التقية، 75/ 421.
[11] انظر:"الاعتقادات"لابن بابويه ص 111.
[12] انظر:"تلخيص الشافي"للطوسي 4/ 131.
[13] انظر:"فتح الباري"12/ 317.
[14] انظر:"تفسير الرازي"4/ 170.
[15] انظر:"تفسير البحر المحيط"لأبي حيان 3/ 191.
[16] انظر:"زاد المسير"لابن الجوزي 1/ 372.
[17] انظر في كتابه"الاعتقادات"، ص114، 115.
[18] انظر:"تفسير البغوي"2/ 26.
[19] انظر:"وسائل الشيعة"11/ 466،"بحار الأنوار"75/ 395.
[20] انظر:"تفسير ابن كثير"2/ 30.
[21] انظر:"الدر المنثور"للسيوطي 2/ 176.
[22] انظر:"المحرَّر الوجيز"لابن عطية 1/ 400.
[23] انظر:"أصول مذهب الشيعة"للقفاري 2/ 981.
[24] انظر:"لسان الميزان"لابن حجر 1/ 10.
[25] انظر:"سنن البيهقي"الكبرى 10/ 208.